खामोश प्रकृति की आवाज़

जो बोलती नहीं, लेकिन सब कुछ कह जाती है

खामोशी का अर्थ

प्रकृति कभी शोर नहीं करती। नदियाँ बहती हैं, हवाएँ चलती हैं, पेड़ झूमते हैं — बिना किसी आवाज़ के। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

आज का सच

आधुनिक जीवन की तेज़ रफ्तार में हमने इस खामोशी को अनदेखा कर दिया है। मशीनों का शोर इतना बढ़ गया है कि प्रकृति की आवाज़ दबती जा रही है।

“जब प्रकृति चुप रहती है, तब इंसान को सुनना चाहिए।”

सुनना क्यों ज़रूरी है?

प्रकृति की चेतावनियाँ समय रहते समझ ली जाएँ, तो बाढ़, सूखा और प्रदूषण जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।

खामोश प्रकृति हमें रुकने, सोचने और सही दिशा चुनने का अवसर देती है।